
स्व. सेठ गुरुमुखदास जवाहरमल कटारिया
स्व.सेठ गुरुमुखदास केवलराम कटारिया जिनकी पुण्य स्मृति मे इस विद्यालय का नामकरण केवलराम गुरुमुखदास (को-एजुकेशनल) इंटर कॉलेज किया गया है |
नवाबशाह सिन्ध का (विभाजनोपरान्त पाकिस्तान) एक छोटा सा करबा है जो जनपदीय महत्व का है। यह नगर स्वच्छ और सामाजिक समरसता की एक मिसाल प्रस्तुत करता है। वहां की सिन्धी हिन्दू जनता ने शिक्षा के प्रचार-प्रसार हेतु सन् 1933 ई. मे नवाब शाह एजूकेशनल सोसाइटी की नींव डाली। शैक्षिक विकास से लोगों में राष्ट्रीयता, सामाजिकता और सहअस्तित्व का भाव जागृत होगा. इस उद्देश्य की सम्पूर्ति की दिशा में कार्य करते हुए यह शिक्षा समिति अग्रसर हुई। उस समय श्री विल्स महोदय नवाबशाह जनपद के जिलाधिकारी थे। नवाब शाह शिक्षा समिति के कार्यकर्ताओं को जिलाधिकारी महोदय ने लोगों की भावना का आदर करते हुए अपने ही निवास के सामने पड़े हुए सात एकड़ के भूमि खण्ड को संस्था को समर्पित कर दिया। इस भूमि-खण्ड पर सर्वप्रथम इस संस्था ने जिलाधिकारी श्री विल्स के नाम से “विल्स हाईस्कूल का संचालन किया।
देश का विभाजन सन् 1947 ई. में होने पर उस समय वहाँ श्री मसूद नाम के जिलाधिकारी थे। उन्होंने विल्स हाईस्कूल विद्यालय की सम्पूर्ण सम्पत्ति को हस्तगत कर लिया। इस सम्पत्ति का मूल्य रु. 98500.00 मात्र आकी गयी।
अब यहाँ स्वर्गीय उधाराम वलीराम हिंगोरागी जी को स्मरण किये बिना तथा श्रद्धा अर्पित किये बिना नहीं रहा जा सकता, जिन्होंने इस नवाब शाह एजूकेशनल सोसाइटी (N.E.S.) के पौधे का आरोपण भारत-विभाजन के उपरान्त आगरा नगर में किया स्व. उधाराम बलीराम हिंगोराणी के सानिध्य में रुपये 13,000/- मात्र की राशि धरोहर के रूप में सुरक्षित थी। यह राशि न. ए. सो. (N.E.S.) सिन्ध की थी, जिसको वे अपने साथ सिन्ध से लाये थे। उन्होंने इस राशि को सन् 1954 में आगरा के सिन्धी समाज की सेवा में अर्पित कर दिया और अपनी सच्चाई तथा परोपकार की भावना का सत्य स्वरूप (आदर्श) सभी सामाजिकों के समक्ष प्रस्तुत किया। सिन्धी समाज अपने इस उत्साही, ईमानदार, सेवाभावी पूर्वज से प्रेरणा अवश्य ग्रहण करेगा और अपनी सतत् अभिवृद्धि, समृद्धि एवं हृदयगत सद्भाव से अनुप्रेरित होकर समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने में सक्षम होगा। स्व. उधाराम वलीराम हिंगोराणी के इस आदर्श प्रतिबिम्ब के रूप में ही इस महानगर में तीन इण्टरमीडिएट कॉलेज- 1. केवलराम गुरुमुखदास (को-एजूकेशनल) इण्टर कॉलेज, हींग की मण्डी, 2, स्वामी लीलाशाह आदर्श सिन्धी इण्टर कॉलेज, शाहगंज, 3. तुलसी देवी बालिका इण्टर कॉलेज, शाहगंज, आगरा अपनी प्रसिद्धि की चरम सीमा को प्राप्त है। प्रत्येक इण्टर कॉलेज से सम्बद्ध प्राथमिक और शिशु मन्दिर भी अपनी शान-मान के साथ संचालित है। कहते हैं कि उस विराट् की सन्निधि में रहकर किसी संत की अन्तरात्मा की ज्योति के विकण कण विद्या मन्दिरों में परिवर्तित हो ही जाती हैं।
दि. 2 जनवरी 1954 को इस सोसाइटी के 30 सदस्यों द्वारा नया संविधान बनाकर रजिस्ट्रार सोसाइटी एक्ट (उ. प्र.) में इस संस्था को भारत में पुनः पंजीकृत करा लिया गया।